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तकनीकी रूप से पश्चिमी कल्चर से आया जेन जी शब्द, प्रचार में क्यों पड़ रहा है भारी, तत्काल इस पर लगे रोक

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भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर से लेकर आदिवासी राज्य झारखंड की राजधानी रांची में युवा छात्रों के प्रोटेस्ट को जेन जी प्रोटेस्ट कहना कितना उचित है?। पश्चिमी संस्कृति से उपजा जेन-Z साहित्य और संस्कृति के जरिए दुनिया में छाप छोड़ने भारत में कितनी तेजी से फैला, इस पर सोचने की जरूरत है।  क्या हम राजनीति के चक्कर में अपनी ही संस्कृति की छवि को धूमिल कर रहे है, या कम आंक रहे है। मीडिया के प्रचार और सियासी हमले में हमारे अपने ही नेता अपनी संस्कृति का मूल्यांकन या तो सही से नहीं कर रहे या अपने सियासी चश्मे से कम कर रहे है।  हमारी अपनी भारतीय संस्कृति में तो युवाओं को नहीं पूरे जीवन काल को बांटा है। फिर हम युवाओं को क्यों श्रेणियों में तोड़ रहे है। नई तकनीक और उनके इस्तेमाल का दौर आता -जाता है।  लेकिन क्या राष्ट्र की भविष्य शक्ति युवा को विभाजित करना कितना सार्थक है, ये आप सोचिए। कई हम अपने देश की युवा शक्ति को गलत शब्दों और सियासी चश्मे में बांटकर और तोड़कर उसे दिग्भ्रमित तो नहीं कर रहे।   कई स्टूडेंट जिनमें ढंग से सोच विकसित भी नहीं हुई होती, वो राजनीतिक छात्र...

कौन चुना गया और कौन सी पार्टी सत्ता में आई, इससे आगे सोचने की जरुरत

विजेता ही सब कुछ ले जाता है, उपविजेता को कुछ नहीं मिलता,  चुनावी प्रणाली और जीत को नए सिरे से परिभाषित करने की आवश्यकता । इसे इस उपचुनाव के उदाहरण से समझ सकते है।  30 जुलाई 2026 को बिहार की बांकीपुर उपचुनाव में करीब 35 फीसदी वोटिंग हुई। गुजरात की मंजलुपर विधानसभा सीट पर 37.5 फीसदी मतदान हुआ।   बांकीपुर में करीब 3 लाख 80 हजार वोट है। पीके को 64 हजार 151 वोट मिले। पीके करीब 19 हजार से अधिक मतों से जीते, यानि उन्हें करीब 17 फीसदी वोट मिले, जबकि 83 फीसदी जनता उनके विरोध में है। हम पीके की जीत पर सवाल नहीं उठा रहे है, लेकिन लोकतांत्रिक देश में क्या अब चुनाव प्रणाली व्यवस्था में सुधार की जरुरत है। क्योंकि बिहार की राजधानी पटना जिले की शहरी विधानसभा सीट पर इतना कम वोट परसेंट क्या वाकई मजबूत और दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की परिभाषा को झुठला रहा है। बिहार वो भूमि है, जिसने दुनिया को लोकतंत्र दिया। हमारा निर्वाचन आयोग इतने दशकों बाद भी ऐसी सीटों पर मतदान परसेंट बढ़ाने में क्यों असमर्थ है । बिहार की बांकीपुर सीट जैसे हालात गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट के है, यहां बीजेपी क...

कानून और सजा से नहीं , सिस्टम और शिक्षा प्रणाली के सुधार से पेपर लीक पर लगेगी रोक

देश के प्रधान ने साफ साफ शब्दों में कहा युवाओं की भलाई और भविष्य से ज्यादा जरूरी कुछ भी नहीं हैं। छात्रों के हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाया जाएगा।  युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले  किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पीएम के इस बयान के बाद पक्ष- विपक्ष के साथ जनता के बीच में फिर से नई बहस शुरु हो गई।  छात्रों के प्रदर्शन में लोकतंत्र की रक्षा करने वाली खाकी की लाठी देश के भविष्य पर वार कर रही है। जिस लाठी को लड़कियों की सुरक्षा में वार करना चाहिए था, वह देश को शर्मसार करने वाली हरकत कर रही है। आज सरकार को तो शर्मिंदा होनी चाहिए, लेकिन उससे पहले उस खाकी को शर्म से डूब मरना चाहिए जो सिविल ड्रेस की आड़ में बदनाम हो रही है। जिस खाकी को रक्षा करनी थी, वह माथा फोड़ रही है, सड़क पर भारत के भविष्य को घसीट रही है, दौड़ा रही है। और सरकार संवाद करने के इंतजार में मौन खड़ी है। राजनीति की आड़ में ही सही युवा छात्रों की मांगों को प्रोटेस्ट से पहले ही बात मान लिया जाता, या उन्हें अब दिया जाने वाला आश्वासन को सरकार पहले ही दे देती तो प्रदर्शन पुलिस पिटाई और पॉलिटिक्स शुरु ही न...

सोशल मीडिया पर सामाजिक तानों का शिकार हुआ परिवार

मुरैना के थाना माता बसैया के पास किशनपुर में हुए हत्याकांड ने समाज, सोशल मीडिया, सॉन्ग के साथ साथ  कथा ज्ञान यज्ञ कार्यक्रम पर सवाल उठा दिये है, क्या आज भी महिलाएं अपने जीवन की खुशियों को नहीं जी सकती, एक महिला ने थोड़ी से खुशी के लिए डांस क्या किया उसके सनकी पति ने उसे मौत के घाट उतार दिया, उन दो मासूम बच्चों की क्या गलती जिनके सामने अभी पूरा जीवन ही जीने के लिए था, पति को पत्नी का डांस नागवार गुजरा या उसे समाज के कुछ लोगों द्वारा मारे गये ताने, उस पति को इतना सा ज्ञान नहीं था कि उसकी शादी के दौरान भी उसकी माता बहिन ने भी इसी प्रकार का नृत्य किया था, क्या  वह यह भूल गया। नृत्य के दौरान भी पत्नी ने घूंघट का ख्याल रखा, पत्नी ने घूंघट से  जो इज्जत बचाई पति को उसकी थोड़ी सी भी लाज नहीं आई, कत्ल करते हुए उसकी मांग भरने वाले हाथ भी इतने नहीं कांपे, इसमें सोशल मीडिया की कोई गलती नजर नहीं आती, जिस कथा यज्ञ का आयोजन ज्ञान के लिये हुआ, वो नारियों के समझे सम्मान दिए बिना अधूरा है। इस दर्दनाक कांड ने रोंगटे ही नहीं, मानव समाज में  पुरुषों की संकीर्ण सोच और उसकी अज्ञानता को फिर स...

मेरी प्रेरणा मेरी ताकत, मेरी हिम्मत मेरा हौसला- मेरे पापा

पापा वैसे तो हर पल माता -पिता का सम्मान और शुभकामनाएं ...., आज फादर्स दिवस है, एक दिन में पिता के जीवन, संघर्ष, सहयोग और उनके आशीर्वाद को समेटना असंभव है, क्योंकि जन्म से लेकर बचपन और पूरे जीवन में पिता की भूमिका हमेशा जादुई जैसी होती है, जिंदगीभर पापा वृक्ष की छाया की तरह हमेशा साथ में खड़े रहते है। मैंने अपने पिता के जीवन से सहयोग की भावना, ईमानदारी, अनुशासन ,जिम्मेदारी, बड़ों का आदर करना और लगन का पाठ पढ़ा हैं। मेरे संघर्ष में मेरे पापा हमेशा हिम्मत और हौसला रूपी पहाड़ की तरह खड़े रहते है, जिसकी वजह से ही, मैं हर संकट के समय में कभी भी हार न मानने की प्रेरणा के साथ टिका हूं। आज पिता दिवस है, हर साल इसकी तारीख बदलती है , लेकिन जीवन रूपी युद्ध और संघर्ष में पापा का प्यार कभी नहीं बदलता। आज के दिन पिता के सम्मान, त्याग और जीवन में उनके मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करता हूं। महसूस करने पर पता चलता है, जीवन को संवारने के लिए पापा की कुर्बानियों के लिए हर सराहना कम पड़ जाती है। पापा की मेहनत, त्याग और प्यार का कर्ज हमेशा मेरे ऊपर है और रहेगा। जब मैं अपने बेटे के साथ खेलता हूं, वो मेरी गो...

भारत में विश्व मंथन-2023 जी 20

जी20 देशों का 18वां शिखर सम्‍मेलन भारत की अध्यक्षता में आज नई दिल्‍ली में शुरू हुआ। भारत की अध्यक्षता में हो रहे समिट की थीम 'वसुधैव कुटुंबकम, एक पृथ्वी-एक परिवार-एक भविष्य' है, जिसके तहत सभी देशों के मिलकर काम करने पर सहमति बनी है, उद्घाटन सत्र में भारत ने अफ्रीकी संघ को समूह का स्‍थाई सदस्‍य बनाया।  दिल्ली में दुनिया प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने अफ्रीकी संघ के अध्‍यक्ष अजाली असोमनी को स्‍थाई सदस्‍य के रूप में स्‍थान ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया। भारत ने सबका साथ, सबका विकास की भावना के साथ अफ्रीकी संघ को जी20 का स्‍थाई सदस्‍य बनाने का प्रस्‍ताव पेश किया था। पहले सत्र की शुरूआत एक के नाम से हुई, वहीं दूसरे सत्र का आरंभ एक परिवार से हुआ। विश्व आर्थिक सहयोग आपको बता दें जी -20 की शुरूआत जी-20 यानी ग्रुप ऑफ ट्वेंटी आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक वैश्विक मंच है। 26 सितम्बर 1999 को इसकी स्थापना हुई थी। जी20 देश दुनिया की 85 फीसदी इकोनॉमी की सहभागिता करते है। जी 20 में 19 देश व यूरोपीय यूनियन शामिल है। 2024 में जी20 का शिखर सम्मेलन की मेजबानी ब्राजील करेगा।  2007 -200...

शिक्षाविद् आचार्य रामदेव भारद्वाज,शिक्षा शोध और सृजनात्मक लेखनी से दुनियाभर में बनाई पहचान

महान शख्सियत की पहिचान उनके कार्यो से होती है, मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जन्में पले पढ़ें महान व्यक्तित्त्व के धनी रामदेव भारद्वाज ने शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है। प्रारम्भिक शिक्षा के दौरान से ही रामदेव शिक्षा के प्रति बेहद चिंतनशील, गंभीर, होशियार परिश्रमी और आज्ञाकारी थे ,बाल शिक्षा से ही उनमें प्रतिभा स्पष्ट तौर पर दिखाई देने लगी थी। जो उनके पूरे जीवन में प्रदत्त होती हुई नजर आई। स्कूली शिक्षा के बाद महान शिक्षाविद् आचार्य भारद्वाज ने पॉलिटिकल साइंस में गोल्ड मेडल प्राप्त कर स्नातकोत्तर की डिग्री जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर से 1980 में उत्तीर्ण की। 1985 में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली से एम फिल एवं 1992 में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से उन्होंने पीएचडी की। आचार्य रामदेव भारद्वाज, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल में कुलपति रहे। इससे पहले आचार्य भारद्वाज ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में कुलाधिसचिव एवं म.प्र. भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय, भोपाल में निदेशक के दायित्व ...