जीवन स्वयं एक स्कूल है और इसके अनुभव हमारे टीचर
जीवन स्वयं एक बड़ा विद्यालय है और इसके अनुभव हमारे शिक्षक हैं। हालांकि, जब हम ‘शिक्षक’ शब्द को औपचारिक अर्थ में लेते हैं तो वह व्यक्ति सामने आता है जो स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय या किसी शैक्षणिक संस्थान में स्टूडेंट को शिक्षित करता है। उसका काम केवल सिलेबस पूरा करना नहीं है। वह स्टूडेंट को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करता है, उसे जागरूक बनाता है, उनमें सोचने की क्षमता विकसित करता है और उसे अपनी इच्छाओं एवं क्षमताओं को पहचानने में सहायता करता है। यहीं से एक महत्वपूर्ण सवाल पैदा होता है-क्या आज शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास कराना और नोट्स उपलब्ध कराना रह गया है? आज का विद्यार्थी अक्सर शॉर्ट नोट्स, संभावित प्रश्न और परीक्षा में काम आने वाली सामग्री चाहता है। मोबाइल और इंटरनेट ने जानकारी तक पहुंच आसान कर दी है, लेकिन जानकारी और ज्ञान में अंतर है। इंटरनेट उत्तर दे सकता है, लेकिन सही सवाल पूछने की क्षमता विकसित करना शिक्षक का काम है। एक अच्छे शिक्षक की पहचान इस बात से नहीं होनी चाहिए कि उसके पास कितने नोट्स हैं, बल्कि इस बात से होनी चाहिए कि उसने कितने विद्यार्थियों को सोचने क...