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Showing posts from May, 2019

मुद्दे कितने ,कौन सा सार्थक

वास्तविक मुद्दे,मंदिर,मस्जिद, मन की बात ,  मेगा रोड शो राजनीति में सार्थक कौन  ? लोकसभा चुनाव  सातवें चरण के साथ  समाप्ति के कगार पर है । 19 का आम चुनाव 19 मई को उम्मीद के साथ संपन्न हो जाएगा ।भारतीय संस्कृति  में सात को शुभ अंक मानने की परंपरा है।जीवन साथी के रूप में सात जन्मों का सम्बंध इन्हीं सात फेरों से सम्पन्न होता है ।चुनावी रण का सातवां चरण किसका साथ देता है ।भारतीय निर्वाचन आयोग ने भी हिंदू परंपरा  को स्वीकार कर सात चरणों में सम्पन्न कराया गया आम चुनाव ।  संसद में बैठी  बीजेपी सरकार जो सभी राजनैतिक पार्टियों के घेरे में है सात  चरण के फेरे सरकार के  मुद्दों का  साथ  देने में  कितना समर्थ  होंगे । 23 मई को मालूम होगा ।  सवा सौ करोड़ जनसंख्या  वाले  देश के चुनाव में सड़क के वो मुद्दें जो मनुष्य  को सड़क पर लाकर खड़े कर देते है राजनैतिक रोड से  नदारद रहे ।इनमें प्रमुखता से सूखे पड़े भारत में समुद्र पानी को रिवर्स ऑस्मोसिस से पीने योग्य बनाना, स्वास्थ्य ,शिक्षा ,सुरक्षा, सकुशल रोजगार ,स्थायी विकास,पर्यावरण संपदा को सुरक्षित,शेयर मार्केट में गरीबों का शेयर,कुपोषण एक गम्भीर समस्या , आदि

गरीबी हटेगी गरीब के शेयर से

अर्थव्यवस्था को गतिशीलता प्रदान करेगा बजट 19 का कुछ अंश यूबीआई नहीं शेयर मार्केट में शेयर से जाएगी गरीबी यूबीआई से बेहतर व्यवस्था गरीबी को टाटा वाय वाय किया जा सकता है ।निम्न कदम बढ़ाकर "आर्थिक दृष्टि से नारी को स्वावलंबन बना कर  परिवार अर्थव्यवस्था से  राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को समग्र मजबूती मिलेगी है "।परिवार अर्थव्यवस्था से गरीबी की छाया  हटेगी   तथा महिलाओ में  राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था कि  सोच विकसित होगी। "परिवार अर्थव्यवस्था के विकास के लिए स्त्रियों की आर्थिक क्षेत्र में  भागीदारी को बढ़ावा और उनकी स्थिति में सुधार करना दोनों ही बातें गरीबी के उन्मूलन और परिवार अवस्था में स्त्रियों के आर्थिक स्वावलंबन पर निर्भर है"। #यह नीति  न्यूनतम आय  सहायता और सिटीजन इनकम राईट से बेहतर होंगी।# आज यही विचार चुनावी मुद्दा बना हुआ है।यूबीआई (यूनिवर्सल बेसिक इनकम) मात्र से गरीबी नहीं हट सकती इससे तो केवल सहायता मिलेंगी जो गरीबी को और प्रोत्साहित करेंगी ।वास्तविक रूप से गरीबी तभी भारत से हट सकती है जब शेयर बाजार में गरीबी के शेयर की हिस्सेदारी सरकार के सहयोग से की जाए जो इनकम

खा रहा है खाद

धूप और धूब  समय के साथ बदलती  जलवायु और विकास की बढ़ती रफ्तार में एक की चुभन  बढ़ रही है तो दूसरी  अपने पैर सिकुड़ रही है । इन दोनों के बीच पिस रहा है थका इंसान।बीते काल के कवि लेखकों की लेखनी ,कविता,कहानियां पढ़े तो अनेक जगह धूप की साया और धूब की खूबियां समस्त साहित्यिक भू पर नजर आती है। इससे मालूम चलता है कि ये मानव के अनुकूल और अनुरूप थी ।मानव की बढ़ती जरूरत और लालची स्वभाव के कदम ने धूब को रौंद कर धूप को बढ़ा दिया ।अरब जनसंख्या  का पेट भरने  के चक्कर में प्रयुक्त खाद ने धूब को खाकर चबा डाला।ग्रामीणों की बात  से पता चलता है कि कभी धूब घुटनों तक हुआ करती थी आज धरती की गोद में समा गई है । चारा का काम करती ये धूब  पशुयों का पेट पालती।प्रसन्न रहते पशु भी  बरसात के दिनों में भूख मिटाते धूब से, पानी में करते अठखेलिया सुनहरी इंद्रधनुषी सी धूप में हरियाली वसंत मौसम का खूब आनंद उठाती।  धरती पर बिछी ये हरी चादर जिस पर पड़ती सुनहरी सूरज की धीमी  रोशनी जो कभी चुभती नहीं । धूब धीरे धीरे पैर सिकुड़ कर आंखों के सामने से  गायब हो रही है । धूब पर पड़ती मोती जैसी ओंस की बूंद  मानो बंद हो गई।मिट्टी को बांधे र

मन और दर्द की चोट

कर्तव्य ने चोट को पछाड़ा बचपन में छोटी सी चोट से बच्चें डर जाते है ।बिना दर्द की चोट के आगे भी डरे नांदान परिंदे भयभीत होकर अपने कर्तव्य को  करने से कतराते है ,या यूं कहे बहाने बनाने लग जाते है ।बास्तव में उनके मन के घर को टटोलने पर कहीं भी कर्तव्य की मूर्ति नजर नहीं आती । उम्र के लिहाज़ से कर्तव्य पूजा करने से अनजान रहता है । दिक्कत तब होती है जब वह इसे पाल के रखता है और भविष्य में ऐसी ही चोट का दर्द उसे कर्तव्य करने को रोकता है  ।बचपन  में  अपने प्रत्यक्ष क्षणिक  लाभ के उद्देश्य से बनाए गए   सिद्धांत  को  जब उम्र के पायदान पर फॉलो करता है तब बच्चे से बने व्यक्ति को हो सकता है कुछ फायदा हो ।विशेष परिस्थितियों को अगर छोड़ दिया जाए  तो यह कुछ फायदा  के चक्कर में कहीं ना कहीं किसी ना  किसी को नुकसान पहुँचा रहा होता है । नुकसान वहां अधिक  बढ़ जाता है जब व्यक्ति कर्तव्य के पद पर बैठा होता है। नुकसान का पुलिंदा बन जाता है जब  शिक्षक अपने नैतिक कर्तव्य शैक्षणिक गतिविधि से भागता है।एक शिक्षक का जब पढ़ाने से जी कतराता है तो वह ना जाने कितने बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य से दूर कर रहा होता है ।धन्य