Posts

Showing posts from August, 2019

जियो जीवन आनंद के साथ ,ये अधिकार आपका

लोकतांत्रिक गणराज्य भारत में नागरिक को महत्वपूर्ण माना गया है। उससे भी ज्यादा  जीवन जीने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी गई है। ताकि मानवीय गरिमा से जीते हुए देश का हर नागरिक  अपना पूर्ण विकास कर सके।बढ़ते विकास के दौर में कामयाबी को छूने में सहायक है स्वतंत्र जीवन जीने का अधिकार।  एक ऐसा अधिकार जिस पर अन्य सभी अधिकार टिके हुए हैं। कानून, कर्तव्य,अन्य अधिकारों का आधार है यह अधिकार। संविधान के आर्टिकल 21 में गारंटी के रूप में दिया गया मूल्यवान अधिकार है ।यह एक ऐसा अधिकार है जो हरेक व्यक्ति के हर पल को प्रभावित करता है। आनंदित जीवन  को प्रभावित करने वाले  हर मुद्दे से न्यायलय सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें  किसी के दवाब और दखलंदाजी से  तनाव ,निराश,उदास  हताश भरी जिंदगी ना जिये जो उसके विकास में रोड़ा बने।इसके लिए उसे मानवीय प्रतिष्ठा के साथ जीने का अधिकार ,प्रदूषण मुक्त जल एवं वायु में जीने का अधिकार ,हानिकारक उद्योगों के विरुध्द सुरक्षा ,जीवन रक्षा का अधिकार, स्वास्थ्य का अधिकार ,शिक्षा का अधिकार अमानवीय व्यवहार के विरुध्द अधिकार ,सरकारी अस्पतालों में समय पर उचित इलाज का अधिकार ,स

सिंधिया को संगठन चाबी या सत्ता कुर्सी

सूत्रों के हवाले से मध्यप्रदेश में कर्नाटक की तर्ज पर नाथ सरकार पर मंडरा सकता है संकट। प्रदेश में  सत्ता की राह देख रही बीजेपी एक बार फिर से राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शाह के नेतृत्व में बीजेपी सरकार बनाना  पसंद करेगी। लेकिन इसके बदले में राज्य की कमान सिंधिया को सौंपी जा सकती है। सिंधिया को महाराष्ट्र की कमान सौंपे जाने से नाराज सिंधिया खेमा कमलनाथ सरकार को मुसीबत में डाल सकता है। सिंधिया  समर्थकों से जब चर्चा की तो समर्थकों का कहना था कि विधानसभा चुनाव में महाराज ने जी तोड़ मेहनत की, सार्थक नतीजे आए ।और महाराज को एक के बाद एक झटके दिये जा रहे है। उन्हें अपने ही राज्य की राजनीति से  षडयंत्रपूर्वक बेदखल किया जा रहा है ।और बाहर भेजा जा रहा है। उनका  साफ कहना है कि महाराज  को अपने प्रदेश  की  कमान सौंपना चाहिए ।कुछ समर्थकों का कहना था कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय की तरह राज्य से बेदखल किया जा रहा है। हम इसे  सहन नहीं करेंगे ।आने वाले नगर निगम के चुनावों में इसका परिणाम देखने को मिल जाएगा। सिंधिया  समर्थकों  में कांग्रेस प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी और मंत्री इम

झुका सहमा डरा घूंघा डॉक्टर सुदामा :सैफई

प्रेम और कर्म की भाषा समझाने के लिए  भगवान ,कृष्ण के रूप में अवतरित हुए ।  जिसे जन्माष्टमी के तौर पर बनाते है ।जब इसमें रोहिणी नक्षत्र लग जाता है तब इसी को कृष्ण जयंती कहा जाता है । जो समाज के उध्दार और कल्याण के लिए हमेशा मार्गदर्शक की भूमिका में रहे । उनके द्वारा दिये गए उपदेश  गीता में  वर्णित है जो  आज भी संसार को मार्ग प्रदान कर रहे है ।  प्रेम और सम्मान की भाषा इससे समझ सकते है जब उनके बचपन का दोस्त डरा सहमा किले में पहुँचा तो सुदामा को इतना सम्मान दिया जिसकी उसने  कल्पना नहीं कि।                     कलयुग में डॉक्टर  के रूप में आया यह भगवान सुदामा  ।मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट)  पास कर  डॉक्टर बनने आए। ये  प्रथम वर्षीय छात्र  जब कॉलेज में प्रवेश हुए तो इनके आका बने बैठे सीनियरों ने परम्परा ,संस्कार, सहायता और अनुशासन के लिए फरमान जारी कर दिया ।डरने सहमने कि जो परम्परा इन्होंने अपने परिवार में नहीं सीखी उसे अब  18 साल  की उम्र उपरांत  सीखाया जा रहा है ।परम्परा में सबसे पहले मुंडन की क्रिया तत्पश्चात श्वेत पत्र की तरह सफेद ड्रेस में कदमताल में कॉलेज हॉस्टल में  आना जाना। बीच मार्ग

अमित की अमिट एतिहासिक छाप ,मगर?।देश हित

  लोकत्रांतिक व  संवैधानिक आधुनिक भारत की संसद  में वैसे तो समय समय पर न्याय प्रक्रिया का इस्तेमाल ना करते हुए  बेहतर और देश हित में फैसले लिए गए है । अनुच्छेद 370  हटाना भी इसी तरह का फैसला है जो देश हित में है।जम्मू कश्मीर राज्य में हर भारतीय का पैसा खर्च किया जाता रहा विकास के नाम पर ,पर उस गैर जम्मू कश्मीर  भारतीय नागरिक को वहां के संविधान ने अधिकारों से दूर रखा जिनमें प्रमुखता से वहां के विश्वविद्यालय से दूर , नौकरियों से दूर ,लड़की की भारतीय नागरिक से शादी करने पर उसकी जम्मू कश्मीर  की नागरिकता रद्द कर देना मुख्य है ।370 भारतीय संविधान के मूल्यवान अधिकारों को रोकती थी । आर्टिकल  370 को जम्मू कश्मीर राज्य ने खो दिया या   बंदूक की नोंक पर भारत सरकार ने  घाटी की बिना  रजामंदी सहमति और विश्वास के   उनके संविधान  को निष्क्रिय कर दिया  राज्य का यही संविधान भारतीय संविधान को उन पर लागू  करने की अपील भी करता है ।राज्य के संविधान ने यह अधिकार राज्य विधानसभा को सुपुर्द किये थे । भारत सरकार का  राज्य के विलय के समय राज्य को  आश्वासन  था कोई चीज थोपी नहीं जाएगी । भारत सरकार अपने आश्वासन से  म