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Showing posts from September, 2019

शौच पर गंदा कौन सड़क सरकार या सोच ?

शौच पर गंदा कौन सड़क या सोच? मध्यप्रदेश के शिवपुरी में 21 वी सदी के भारत की सोच सामने आई है । सिरमौर थाना के भावखेड़ी गांव में दबंगो ने 2 दलित बच्चों की बेरहमी से पीट पीट कर हत्या कर दी ।बताया ये जा रहा है कि बच्चे सड़क पर सोच कर रहे थे।तभी दबंग यादव वहां से निकले और उन अबोध अनजान मजबूर बच्चों से कहने लगे तुम सड़क गंदा कर रहे हो ? इसी के साथ लाठीयों की वर्षात करते हुए 10 साल के अविनाश और13 वर्षीय रोशनी को  लाठियों से मारना शुरू कर दिया जिसके चलते दोनों निर्धन परिवार के बच्चों की हत्या कर दी गई  गई । मासूम बच्चों की हत्या से पूरा परिवार स्तब्ध और सदमें में है।झोपड़ी में रहने वाले इन बच्चों के घर में मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है।सदियों से खामोश झोपड़ी की आवाज 21 वी सदी में दबा दी।अमेरिका में 130 करोड़ भारतवासियों का सम्मान बढ़ाने वाले पी एम नरेंद्र मोदी क्या इन करोड़ो देश वासियों में  झोपड़ियों में रहने वाले ये गरीब परिवार भी है ?।पीएम की शौच मुक्त भारत योजना कागजों और भाषणों में है ।तभी तो भावखेड़ी गांव खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित है ।ओडीएफ घोषित के बावजूद भी दलित घर में शौचालय नहीं बने। गांव

बाढ़ में बांध की भूमिका

सत्ता के सर्वे और मुहावजे में किसान  मध्य प्रदेश में लगातार भारी बारिश से किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकारें एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं ।राज्य सरकार केंद्र पर तो केंद्र सरकार के नेता राज्य सरकार पर मुआवजे को लेकर आरोप लगा रहे हैं। राज्य सरकार के मंत्री केंद्र को दोबारा सर्वे करने की नसीहत दे रहे है । तर्क में कहा जा रहा है  केंद्र की समिति जिस समय सर्वे करने आई उस समय खेतों में पानी भरा हुआ है ।खेत तालाब बन चुके है ।बस्तियां पानी पानी हो गयी है ।ऐसे में सही सही  सर्वे करना मुश्किल है ।वहीं विपक्ष कमलनाथ सरकार पर मुहावजे देने का दबाव डाल रही है । राज्य के मुखिया कमलनाथ  बाढ़ पीड़ितों और बर्बाद किसानों को कुछ राहत कि घोषणा कर केंद्र सरकार से राहत पैकेज की मांग कर रहे है ।अनुमानित रुप से ये राहत पैकेज करीब 12 हज़ार करोड़ रुपए का लगाया जा रहा है।राज्य सरकार के मंत्री भाजपा नेताओं से केंद्र सरकार से रुपये मांगने की बात कह रहे है तो वहीं पूर्व सी एम शिवराज सिंह चौहान राज्य सरकार पर एक भी कोरा चिठ्ठा केंद्र सरकार को ना भेजने का आरोप लगा रहे है। आरोपों के  वार पलटवार का ये दौर चलता

आस्था की मौत

आस्था की मौत लापरवाह  भोपाल: आस्था शौक मौत शोक संवेदना और सबक मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल शहर में सरकार चलाने वाले नेता और प्रशासनिक अफसरों के रहते हुए भी उनके सामने उनके अपने निवासरत शहर में मौत का ये  खेल चलता रहा ।पुलिस हेड क्वार्टर और नगर निगम से महज  चंद  कदम दूर भगवान के भक्त पानी में गोते खाते हुए एक दूसरे का हाथ थामे हुए चीखते चिल्लाते रहे ।फरिश्ता बनकर आया नितिन मौत के भंवर में अकेला जूझते  हुए 6 जिंदगियां बचाने में कामयाब हुआ।बालक चिल्लाते रहे पुकारते रहे बचाओ बचाओ बचा लो बचा लो पर बहरे अधिकारीयों के कान तक नहीं फड़फड़ाए ।भक्त अंतिम सांस तक चिल्लाते पुकारते रहे । अंत में जब कोई नहीं पहुँचा तब ये सांसे हमेशा हमेशा के लिए थम गई। ये वो आवाजें थी जो  मोहल्ला और घरों में गूंजा करती थी।एक बस्ती के 12 घरों की आवाज अब कहां गूंजेगी । ये गरीब की झोपड़ियों की आवाजें थी ।जो कहीं ना कहीं आस्था के नाम पर लापरवाही  के कारण मौत का शिकार बनी ।  मोहल्ला वासियों के कानों में जब ये आवाजें सुनाई  देगी तो उनकी आंखों से सिर्फ आंसू की नम धारा ही बहेगी। उनके साथी कैसे उन्हें भूल पाएंगे ।इस दर्दनाक

समाज सुधार आंदोलन के पिता -पेरियार

ज्ञान विज्ञान के घर दिमाग में काल्पनिक भगवान की कोई जगह नहीं -पेरियार          तमिल भाषा में पेरियार का अर्थ सम्मानित व्यक्ति और पवित्र आत्मा होता है। सम्मानित व्यक्ति वही हो सकता है जिसके पास तर्क,बुद्धि,वैज्ञानिक सोच हो । जो पाखण्डवाद,पूजा रूढ़ीवादी परम्परा से दूर रहता हो।और दूसरों को भी रूढ़ीवादी,आडंबर,काल्पनिक जैसी चीजों से दूर रखने का सुझाव देता हो ।जो साइंस पर विश्वास रखता हो जिसकी सोच वैज्ञानिक हो उसे समझता हो ।उसे समझकर  जीवन में आगे बढ़ने का प्रयास करते हुए सत्यता वास्तिवकता की कसौटी पर खरा उतरता हो । वास्तविकता सत्यता साइंस पर खरा उतरते हुए दूसरों को भी  स्वयं ज्ञान बुध्दि से सोचकर निर्णय लेने को  प्रेरित करता हो, उनका कहना था किसी भी चीज, विचार को स्वीकार करने से पहले उस पर विचार करो, तुम समझते हो कि इसे तुम स्वीकार सकते हो तभी इसे स्वीकार करे अन्यथा इसे छोड़ दे।ऐसे महान क्रांतिकारी तर्कवादी समाजसुधारक सम्मानित व्यक्ति का जन्म   तमिलनाडु में 17 सितम्बर 1879 को एक सम्पन्न घर में हुआ। जिनका नाम ई वी रामास्वामी नायकर था ।सर्व सुविधाओं से सम्पन्न पेरियार जी ने सत्य का साथ देते हु

आस्था की मौत

लापरवाह  भोपाल: आस्था शौक मौत शोक संवेदना और सबक मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल शहर में सरकार चलाने वाले नेता और प्रशासनिक अफसरों के रहते हुए भी उनके सामने उनके अपने निवासरत शहर में मौत का ये  खेल चलता रहा ।पुलिस हेड क्वार्टर और नगर निगम से महज  चंद  कदम दूर भगवान के भक्त पानी में गोते खाते हुए एक दूसरे का हाथ थामे हुए चीखते चिल्लाते रहे ।फरिश्ता बनकर आया नितिन मौत के भंवर में अकेला  जूझता हुए6 जिंदगियां बचाने में कामयाब हुआ।बालक चिल्लाते रहे पुकारते रहे बचाओ बचाओ बचा लो बचा लो पर बहरे अधिकारीयों के कान तक नहीं फड़फड़ाए ।भक्त अंतिम सांस तक चिल्लाते पुकारते रहे । अंत में जब कोई नहीं पहुँचा तब ये सांसे हमेशा हमेशा के लिए थम गई। ये वो आवाजें थी जो  मोहल्ला और घरों में गूंजा करती थी।एक बस्ती के 12 घरों की आवाज अब कहां गूंजेगी । ये गरीब की झोपड़ियों की आवाजें थी ।जो कहीं ना कहीं आस्था के नाम पर लापरवाही  के कारण मौत का शिकार बनी । मोहल्ला वासियों के कानों में जब ये आवाजें सुनाई  देगी तो उनकी आंखों से सिर्फ आंसू की नम धारा ही बहेगी। उनके साथी कैसे उन्हें भूल पाएंगे ।इस दर्दनाक तड़पती घटनाओं क

अधिकार में खो रहे है शिक्षा और सम्मान

अधिकारों के साथ खो रहे है शिक्षा और सम्मान।       आजाद भारत में  पहले स्कूल नहीं थे स्कूलों की मांग थी । भूखे भारत ने परिस्थितयों से जूझते हुए विकास की राह पकड़ी । हरित क्रांति और वैश्वीकरण से  रफ्तार पकड़ी और तेजी से दौड़ने लगा । इसके  दौड़ने में  एक कदम शिक्षा के निजीकरण का भी था।जो सरकार के संरक्षण में  और व्यापारिक नहीं था ।उसका लालन पालन खुद संस्था थी ।तब यह सरकारी व्यवसाय ना होकर निजी और शिक्षा हितैषी था ।इस समय सरकारी स्कूल पर्याप्त नहीं थे ।तो निजी स्कूलों  ने शिक्षा का स्तर और भारत की साक्षरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की ।ये वो दौर था जब साक्षरता  के साथ साथ शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ रही थी । जैसे ही 21 वी सदी में हम  आरटीइ RTE अधिकार के  साथ निजी शिक्षा में कूदे शिक्षा का स्तर डगमगा गया। सवाल यह उठता है कि इस अधिकार की क्या जरूरत पड़ गई ।जबकि हमारे संविधान में  14 साल  के बच्चों को  निशुल्क शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार पहले से मौजूद है। RTE राइट टू एजुकेशन राज्य के वित्त को प्राइवेट स्कूलों  को देकर सरकारी शिक्षा तंत्र को खत्म करने की एक  दूरगामी साजिश योजना है ।इसे आप एक उदाह