गरीबी हटेगी गरीब के शेयर से

अर्थव्यवस्था को गतिशीलता प्रदान करेगा बजट 19
का कुछ अंश
यूबीआई नहीं शेयर मार्केट में शेयर से जाएगी गरीबी
यूबीआई से बेहतर व्यवस्था

गरीबी को टाटा वाय वाय किया जा सकता है ।निम्न कदम बढ़ाकर
"आर्थिक दृष्टि से नारी को स्वावलंबन बना कर  परिवार अर्थव्यवस्था से  राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को समग्र मजबूती मिलेगी है "।परिवार अर्थव्यवस्था से गरीबी की छाया  हटेगी   तथा महिलाओ में  राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था कि  सोच विकसित होगी। "परिवार अर्थव्यवस्था के विकास के लिए स्त्रियों की आर्थिक क्षेत्र में  भागीदारी को बढ़ावा और उनकी स्थिति में सुधार करना दोनों ही बातें गरीबी के उन्मूलन और परिवार अवस्था में स्त्रियों के आर्थिक स्वावलंबन पर निर्भर है"। #यह नीति  न्यूनतम आय  सहायता और सिटीजन इनकम राईट से बेहतर होंगी।# आज यही विचार चुनावी मुद्दा बना हुआ है।यूबीआई (यूनिवर्सल बेसिक इनकम) मात्र से गरीबी नहीं हट सकती इससे तो केवल सहायता मिलेंगी जो गरीबी को और प्रोत्साहित करेंगी ।वास्तविक रूप से गरीबी तभी भारत से हट सकती है जब शेयर बाजार में गरीबी के शेयर की हिस्सेदारी सरकार के सहयोग से की जाए जो इनकम यूबीआई में देने की बात की जा रही है।

स्वामीनाथन आयोग की लागत मूल्य की  सिफारिशों को लागू करते हुए डेढ़ गुना खरीद मूल्य बजट में प्रमुखता दें । सरकार खेती ,किसान को समर्थन मूल्य तक सीमित नहीं रखना चाहती इसके लिए  ग्रामीण कृषि मार्केट की संख्या बढ़ाने  के साथ साथ विकसित करने के उद्देश्य से अलग  कोष बनाने की जरूरत है।  जिससे किसान  सीधे उपभोक्ता को  अपना माल बेच पायेगा। छोटे किसानों को  बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी। किसानों को  सीधा फायदा मिलें ।गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य बढ़ाया जाए क्योंकि इससे महिलाओं के जीवन यापन में सुधार  के साथ  साथ  पर्यावरण प्रदूषण  भी कम हुआ, लकड़ी  की कम खपत हुई जिसका लाभ  राष्ट्र को हुआ।

अर्थव्यवस्था के लिए कठोर और सही कदम उठाए सरकार ।
सरकार द्वारा फर्टिलाइजर फूड और सिंचाई  सब्सिडी को कम किया जा  सकता है। इस रकम को देश के  किसान परिवारों को सीधे वितरित कर सकती है। समाज के सभी वर्गों को एक साथ लाभ देने की घोषणा की जाए । शेयर बाजार में लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ पर लगने वाला कर हट सकता हैं।
उद्योगों के लिए घोषणाओं में कपड़ा सेक्टर में काफी उम्मीद है। क्योंकि वस्त्र उद्योग देश में सबसे बड़े पैमाने पर रोजगार देता है।
उधोगों में गरीबों की हिस्सेदारी और दोहरीनीति  आने वाली सरकार लागू करें ।दोहरी नीति में उधोगों को सब्सिडी (जो सरकार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से  देती है) और गरीबों कि ओर से शेयर मार्केट में सरकार रुपए लगाए ।सब्सिडी से उधोगों को लाभ इससे बस्तुओं के सस्ते दाम रहेंगे और अधिक खरीदी से उधोगों को डबल नफा होगा । गरीबों के  शेयर लगाने से उद्योगों को अधिक पैसा मिलेगा जिसका उपयोग उत्पादन में कर सकते है । उधोगों में जिस पैसे पर बड़े कारोबारियों का आधिपत्य  है वह कुछ हाथों में सिमटकर नहीं रहेगा।इस प्रकार देश गरीबी  मुक्त हो सकता है ।

लेखक
आनंद जोनवार

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