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उपचुनाव का परिणाम तय करेगा मप्र का भविष्य, सत्ता और संगठन में बदलाव के संकेत

पंजाब में आई  राजनीति की नई धार का असर मध्यप्रदेश में पड़ने के अनुमान है। पिछले महीने अमरिंदर सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। और उसके कुछ दिन बाद ही अमरिंदर सिंह की बीजेपी के वरिष्ठ नेता केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह  से लंबी बैठक की चर्चा ने साफ तौर पर संकेत दे दिए कि दोनों का एक साथ आना तय है। कांग्रेस से आए अमरिंदर को बीजेपी ने बिना देरी किए अपने पाले में कर लिया। पूर्व सीएम ने भी सिद्धू पर राष्ट्र सुरक्षा के खतरे का बयानी  वार कर सिद्धू को  मुखिया गद्दी पर पहुंचने से रोका ही उससे कई  ज्यादा अपनी देश भक्ति का परिचय देकर देशभक्ति के सहारे  बीजेपी से सांठगांठ कर अपने भविष्य की राजनीतिक जमीन तैयार कर ली।  अभी हाल ही में अमरिंदर सिंह ने किसानों को केंद्र में रखकर नई पार्टी बनाने का फैसला किया है। जो  किसानों को समर्पित होगी।  अमरिंदर की  किसान केंद्रित पार्टी नई पार्टी के सहारे बीजेपी अपने खिलाफ हो रहे  किसान आंदोलन का हल ढूंढना चाहेगी। जिसका लाभ उसे आगामी चुनाव में मिल सके ।  एक खबर के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्र...

काकोरी में कांड जोड़ना इतिहासकारों भूल, यूपी में कंडो की लिस्ट किसकी भूल

भारत अपनी आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 'आजादी अमृत महोत्सव' मना रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार ने  'चौरी चौरा महोत्सव' कार्यक्रम के तहत 'काकोरी ट्रेन एक्शन' की 97वीं वर्षगांठ मनाई। जिसमें उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 'काकोरी कांड' का नाम बदलकर 'काकोरी ट्रेन एक्शन डे' कर दिया है।  उनका कहना है कि ब्रिटिश कालीन इतिहासकारों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी इस महत्वपूर्ण घटना के नाम में 'कांड' जोड़ दिया था, जो अपमान की भावना को दर्शाता है. इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार ने काकोरी की घटना को ट्रेन एक्शन करार दिया और कांड शब्द को हमेशा के लिए मिटा दिया। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 19 मार्च 2017 को जब सत्ता संभाली और शपथ ली, कि गुंडे और माफिया प्रदेश छोड़ दें या फिर अपराध करना,  वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें. योगी सरकार ने इसकी शुरुआत सड़क छाप मजनुओं के लिए एंटी रोमियो स्क्वाड से की थी। महिला संबंधी अपराध पर गंभीरता दिखाते हुए की गई इस शुरुआत के कुछ दिनों बाद ही योगी सरकार में शातिर लुटेरों-डकैतों के खिलाफ एनकाउंटर का द...

जाति का हाथी अब सबका साथी

वर्तमान भारत पर मायावती  प्रभाव का स्वरूप और दलित मानसिकता ब्राह्मण बनियों का बहुजन समाज पार्टी में आने से मायावती की रहस्यात्मकता और बढ़ी है.जबकि उनके विरोधी अनुसूचित जाति के नेताओं ने इस कलाबाजी को दलितों के साथ विश्वासघात बताने की कोशिश की है. पर इन समुदायों ने इसे विचारधारा में मिलावट नहीं बल्कि बढ़ती हुई दलित शक्ति की प्रतिष्ठा माना है. उत्तर प्रदेश में ऐसे जातिगत समझौते से बसपा को सफलता मिली . इसके साथ ही चारों तरफ यह उम्मीद बंधी है कि यह स्थिति देश के दूसरे भागों में भी अपनाई जा सकती है .समर्थक इस बारे में एकमत है कि मायावती एक उम्मीद है जो भविष्य के लिए जगाती है.पूर्व मुख्यमंत्री अब ऐसी राजनीति शक्ति का प्रतीक है जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती जो लोग शताब्दियों से दूसरों के टुकड़ों पर पलते रहे हैं.उनके लिए ये विचार मात्र है की एक दलित नेत्री एक मेजबान की जगह बैठी होगी पूरे समुदाय में शक्ति का संचार कर देता है. ऐसे में बीएसपी पर उस नौजवान नेता का आरोप कितना सही है कि  दलित का वोट ब्राहमणों का नेतृत्व. जबकि सत्ता राजनीति में सब जायज है । यह सच्चाई है कि मायावती अब अन्य नेत...

जीवन की पुस्तक का पहला पाठ मेरे पापा

तमाम मुसीबतों के बाद  मीलों दूर आज मैं जिस मुकाम पर मौजूद हूं.वो सब पापा की वजह से हूं. उनके मजबूत इरादे दृढ़ सोच और सहयोग से मैंने जीवन में आई हर परिस्थिति का मुकाबला डटकर किया.जिसका पाठ पापा ने बचपन में ही पढ़ा दिया था. बचपन से लेकर अब तक हर कदम पर पिताजी उंगली थाम के चले उन्होंने समय समय पर हर उंगली को पकड़ा और परिस्थिति में रास्ता को आसान कर दिया. वो दुख के भाव छिपाकर  आँखों से सदैव प्यार का नीर बहाते रहे. वो मेरे लिए किस्मत से भी लड़े और मुझे भी लड़ना सिखाया, तभी तो मुझे आज तक ना कोई धूप मुरझा सकी, ना दुविधाओं की आंधी डिगा सकी.    पापा खुदा की तस्वीर मेरी तकदीर पापा का प्यार निराला है. उनका साया मेरे सर पर रब के रूप में है.वो मेरे खुदा है मेरी तकदीर है. पुत्र पिता का नाता एक अनोखा न्यारा पवित्र रिश्ता है. इस रिश्ते को एक दिन या एक पोस्टर में समेटा नहीं जा सकता.जीवन का हर पल इस रिश्ते की तस्वीर है. तभी तो पापा के लिए पिता डैड डैडी फादर जैसे सम्मानित शब्द है.पिताजी प्रेम त्याग करुणा का एक सच्चा जीवंत उदाहरण है . प्यारे न्यारे पापा बेटे की हर छोटी से छोटी बड़ी से ब...

तपस्वी सिध्दार्थ से तथागत सम्यक संबोधि

जब से मानव सभ्यता शुरू हुई है, तब से अब तक मानव ने जीवन के हर क्षेत्र में बहुत उन्नति की है. जिससे अनेक मुश्किलें आसान हुई है. और लोगों की भौतिक सुख सुविधाओं में वृध्दि हुई है. परन्तु इस चहुंमुखी विकास के बावजूद हमारे मन के मौलिक स्वभाव में कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ. सब जगह राग द्वेष है जो एक दूसरे से टकराहट का कारण बनती है.गौतम बुद्ध की शिक्षाओं का मूल उद्देश्य इसी  राग और द्वेष  की समस्या का निराकरण करके टकराहट को समाप्त करना है . भारतवर्ष सदैव बुध्दों  की  पुण्य भूमि रहा है .यहाँ अनेक बुध्दों का प्रादुर्भाव  हुआ हैlसिद्दार्थ गौतम बुद्ध अट्ठाइसवें बुध्द थे. गौतम ने गलत बहुमत के आगे झुकने के बजाय पवज्या का जीवन व्यतीत करने का निर्णय लिया. और अपनी जिज्ञासा पूरी करने के लिए घर छोड़ दिया.लौकिक सुख अपार संपदा वैभव का त्याग कर सन्यास लेने वाले सिध्दार्थ  इतिहास में अभूतपूर्व इंसान  है. जो राजा से फकीर बन कर सम्यक संबोध बने. उनकी संपूर्ण शक्ति सत्य की खोज पर केंद्रित थी.राज गृह त्याग कर गौतम ने हाथ में भिक्षा पात्र लेकर गली-गली घर घर  द्वार द्वार भिक...

मुरैना के पहले संत जिसने की पूरे भारत की पद यात्रा

मुरैना के प्राचीनतम  गांव  कुंतल पुर के महान संत श्री श्री 1008 बलराम त्यागी जी का कोरोना संक्रमण से देर रात रतलाम मेडिकल कॉलेज में निधन हो गया. वर्तमान में  कुतवार नाम से जाने  जाना वाला गांव महाभारत काल में  कुंतीभोज  के नाम से  प्रचलित था .   बलराम  की मां  का नाम बिट्टो और पिताजी का नाम तुलाराम नरवरिया था . माता पिता की पांच  संतानों में  बलराम जी तीसरे नम्बर के तेजतर्रार पढाई में रुचि रखने वाले थे.शिक्षा के चलते  वो अपने गांव से करीब दस किलोमीटर अपने मामा भजनलाल एवं नेतराम के घर, गांव दतहरा  नरिहाई पुरा आ गए. 12 वी तक पढ़ाई  करने के बाद  बलराम अचानक श्री श्री 1008 अभिराम दास  महात्यागी महाराज उमरी कुंड के शिष्य बने और  संत समाज में स्थान पाया . अपने गुरु जी  के आशीर्वाद से लगातार  18 वर्ष तक धुनी  तप किया .सिर के सहारे  दोपहर में होने वाली इस तपस्या की झलक  डेढ़ दशक पूर्व  कड़ी धूप में  राम जानकी मंदिर मुरैना में  देखने को मिली.ग्वालियर से लगभग 40किम...

बदलती भारतीय राजनीति का विचार :कांशीराम

भारतीय समाज में राजनीति उभार का  चेहरा-  कांशीराम 15 मार्च 1934 को जन्में   कांशीराम   की जयंती पर पूरा भारतीय समाज उन्हें दिल से नमन करता है . कांशीराम  एक सामाजिक आंधी जिसने बीएसपी से भारतीय समाज के वट वृक्ष को झकझोर दिया। उनके विचारों में चट्टानी द्रढ़ता और संकल्पों में अडिगता थी। उन्होंने ब्रिटिश गेल ओम्बेट की कल्चरल रिवोल्ट इन कोलोनियल इंडिया बुक को गहनता से पढ़ने के बाद गुरुग्रंथ साहब भी पढे. कांशीराम  पूंजीवाद समाजवाद मार्क्सवाद साम्यवाद  गांधीवाद का  भारतीय समाज में कोई महत्व नहीं  समझते  ,ना ही  वो  भारतीय समाज के  लिए है ।  कांशीराम   देश में पसरी समस्त  सामाजिक राजनीतिक समस्याओं के लिए जातिवाद  को दोषी मानते थे.उनका मानना था दुनिया के सारे वाद यहां आकर  विलीन हो जाते हैं। इसलिए कांशीराम ने डॉक्टर राम मनोहर लोहिया के गैर कांग्रेसवाद  को अपना राजनैतिक मिशन बनाया है।  कांशीराम  छुटपुट सरकारी सुविधा और आरक्षण को सिर्फ झुनझुना समझते थे इसी आधार पर वे गांधीवाद का विरोध क...