सोशल मीडिया पर सामाजिक तानों का शिकार हुआ परिवार

मुरैना के थाना माता बसैया के पास किशनपुर में हुए हत्याकांड ने समाज, सोशल मीडिया, सॉन्ग के साथ साथ  कथा ज्ञान यज्ञ कार्यक्रम पर सवाल उठा दिये है, क्या आज भी महिलाएं अपने जीवन की खुशियों को नहीं जी सकती, एक महिला ने थोड़ी से खुशी के लिए डांस क्या किया उसके सनकी पति ने उसे मौत के घाट उतार दिया, उन दो मासूम बच्चों की क्या गलती जिनके सामने अभी पूरा जीवन ही जीने के लिए था, पति को पत्नी का डांस नागवार गुजरा या उसे समाज के कुछ लोगों द्वारा मारे गये ताने, उस पति को इतना सा ज्ञान नहीं था कि उसकी शादी के दौरान भी उसकी माता बहिन ने भी इसी प्रकार का नृत्य किया था, क्या  वह यह भूल गया। नृत्य के दौरान भी पत्नी ने घूंघट का ख्याल रखा, पत्नी ने घूंघट से  जो इज्जत बचाई पति को उसकी थोड़ी सी भी लाज नहीं आई, कत्ल करते हुए उसकी मांग भरने वाले हाथ भी इतने नहीं कांपे, इसमें सोशल मीडिया की कोई गलती नजर नहीं आती, जिस कथा यज्ञ का आयोजन ज्ञान के लिये हुआ, वो नारियों के समझे सम्मान दिए बिना अधूरा है। इस दर्दनाक कांड ने रोंगटे ही नहीं, मानव समाज में  पुरुषों की संकीर्ण सोच और उसकी अज्ञानता को फिर से सामने ला दिया है।
पुरुष सोच से मानवता फिर शर्मसार हुई है।
पुरुष की पिछड़ी मानसिकता ने पूरे परिवार को उजाड़ दिया, औरतें घर परिवार की जिम्मेदारी में इतनी व्यस्त रहती है कि खुद के लिए समय नहीं निकाल पाती, उसे खुशी के लिए थोड़ा समय मिला , जिसमें उसने एंजॉय किया, उसने अपनी कला को व्यक्त किया, भारतीय संस्कृति में कई  तीज त्योहारों  पर महिलाओं के नृत्य का विशेष महत्व है। मौतों के इस तांडव को देखकर सुनकर भी वो पुरुष समाज आज भी महिला के नृत्य पर सवाल खड़ा कर रहा होगा।  महिलाओं और मानवीय समाज को ऐसे पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता को बदलना होगा।

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