जीवन स्वयं एक स्कूल है और इसके अनुभव हमारे टीचर
जीवन स्वयं एक बड़ा विद्यालय है और इसके अनुभव हमारे शिक्षक हैं। हालांकि, जब हम ‘शिक्षक’ शब्द को औपचारिक अर्थ में लेते हैं तो वह व्यक्ति सामने आता है जो स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय या किसी शैक्षणिक संस्थान में स्टूडेंट को शिक्षित करता है। उसका काम केवल सिलेबस पूरा करना नहीं है। वह स्टूडेंट को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करता है, उसे जागरूक बनाता है, उनमें सोचने की क्षमता विकसित करता है और उसे अपनी इच्छाओं एवं क्षमताओं को पहचानने में सहायता करता है।
यहीं से एक महत्वपूर्ण सवाल पैदा होता है-क्या आज शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास कराना और नोट्स उपलब्ध कराना रह गया है? आज का विद्यार्थी अक्सर शॉर्ट नोट्स, संभावित प्रश्न और परीक्षा में काम आने वाली सामग्री चाहता है। मोबाइल और इंटरनेट ने जानकारी तक पहुंच आसान कर दी है, लेकिन जानकारी और ज्ञान में अंतर है। इंटरनेट उत्तर दे सकता है, लेकिन सही सवाल पूछने की क्षमता विकसित करना शिक्षक का काम है।
एक अच्छे शिक्षक की पहचान इस बात से नहीं होनी चाहिए कि उसके पास कितने नोट्स हैं, बल्कि इस बात से होनी चाहिए कि उसने कितने विद्यार्थियों को सोचने की क्षमता दी। असली गुरु वह है जो विद्यार्थी को अपने ऊपर निर्भर नहीं बनाता, बल्कि उसे स्वतंत्र रूप से उचित सोचने के काबिल बनाता है।
नोट्स स्टूडेंट को किसी प्रश्न का उत्तर रटा सकते हैं, लेकिन सोच उसे जीवन की नई परिस्थितियों में उत्तर खोजने की क्षमता देती है। शिक्षक का दायित्व केवल यह बताना नहीं कि ‘क्या पढ़ना है’, बल्कि यह समझाना भी है कि ‘क्यों पढ़ना है’, ‘कैसे समझना है’ और ‘इस ज्ञान का इस्तेमाल कहां-कैसे करना है।
एक शिक्षक विद्यार्थी को केवल नौकरी के लिए नहीं, जीवन के लिए तैयार करता है। वह उसके भीतर जिज्ञासा पैदा करता है, सवाल पूछने का साहस देता है और असफल होने के बाद फिर से प्रयास करने की प्रेरणा देता है। इसीलिए शिक्षक का सबसे बड़ा योगदान उसकी दी हुई किताब या नोट्स नहीं, बल्कि विद्यार्थी के भीतर पैदा की गई नई सोच है।
टीचर’ शब्द का अर्थ केवल स्कूल, कॉलेज या कोचिंग में पढ़ाने वाले शिक्षक तक सीमित नहीं है। दरअसल, हमारे जीवन में हर वह व्यक्ति, परिस्थिति, रिश्ता, किताब या अनुभव एक शिक्षक की भूमिका निभाता है, जिससे हमें कुछ सीखने को मिलता है।
मां-बाप हमें जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं। दोस्त हमें रिश्तों की समझ देते हैं। कई रिश्ते हमें धैर्य, विश्वास, त्याग और व्यवहार का अर्थ समझाते हैं। कभी-कभी कोई अजनबी व्यक्ति भी जीवन के कुछ मिनटों में ऐसी बात कह जाता है, जो वर्षों तक याद रहती है। किताबें हमें बिना हमारे सामने आए विचार देती हैं और जीवन के कुछ दृश्य बिना एक शब्द बोले ऐसी सीख दे जाते हैं, जिसे कोई कक्षा नहीं दे सकती। इस अर्थ में देखा जाए तो शिक्षक केवल वह नहीं है जो हमें पढ़ाता है, बल्कि वह भी है जिससे हम सीखते हैं।
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